48 ग्रंथ
गुरुत्तं भाग- 16
प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग -16" परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के प्रवचनों का संकलन है। जहां इसमें "धम्मो मंगल मुक्किट्ठं, प्रजातंत्र, अहिंसा, अपरिग्रह" शीर्षकों पर उपदेश दिया वहीं श्री राम का आदर्शमय जीवन व सेवा ही परम धर्म जैसे विषयों पर भी वक्तव्य देकर सामान्य जन को आत्मोन्नति का मार्ग प्रदर्शित किया।
गुरुत्तं भाग- 5
प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-5" में परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के द्वारा रेवाड़ी (हरियाणा) में हुई मीठे प्रवचन श्रंखला को संकलित किया गया है। जिसमें पूज्य श्री ने "कौन धनी त्रिशला के महल का, अपने घर को स्वर्ग कैसे बनाएं, जिंदगी का चार्जर" इत्यादि मार्मिक, सारगर्भित, गूढ़ और बहुजनोपयोगी विषयों का विवेचन किया है। इसे पढ़कर पाठक सुख-शांति के शाश्वत मार्ग पर अग्रसर होकर आत्मान्वेषी बन सकता है।
गुरुत्तं भाग- 6
प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-6" परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के ग्रीन पार्क दिल्ली 2017 चातुर्मास में आयोजित मीठे प्रवचन श्रृंखला में हुए प्रवचनों का संकलन है। इसका प्रत्येक प्रवचन जन-जन के लिए उपयोगी, मनमोहक सौन्दर्य व पराग से परिपूर्ण गुलदस्ते के समान है। इसमें "टकराव नहीं समझौता, आई. पी.एस. , हारिये मत हिम्मत, मैं ही क्यों" आदि विषयों पर जीवन की दिशा व दशा को बदलने वाले आकर्षक प्रवचन हैं।
गुरुत्तं भाग- 9
प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग -9" में परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज के मुखारविंद से नि:सृत तीर्थंकर प्रकृति की कारणभूत सोलहकारण भावना के आगमोक्त अद्भुत चिंतन को शब्दों के आभूषणों से विभूषित किया गया है। इसके 18 प्रवचनों में भाषा अत्यंत सरल, सुबोधपूर्ण एवं प्रांजुल है जो कि प्रत्येक पाठक के लिए सहज ही हृदयंगम करने योग्य है।
गुरुत्तं भाग-1
प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-1" में परम पूज्य आचार्य श्री वसुनन्दी जी मुनिराज के मंगलमय, हितकारी प्रवचनों का संकलन है। इसके अंतर्गत "पुण्य के साथी, दुष्ट संग से करो किनारा, भ्रष्टाचार क्यों, ज्ञान के शत्रु, गांठ खोल देखी नहीं, चित्त शुद्धि इत्यादि चित्त को निर्मल करने वाले सार गर्भित, सैद्धांतिक विषयों का अनुपम विवेचन है। ज्ञान के पिपासु इस पुस्तक का अध्ययन सहज भाव से करें।
गुरुत्तं भाग-2
प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-2" में परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज के हृदय में विद्यामन ज्ञान के विशाल समुद्र की अनुपम अमृत धारा है जिसमें कि "भाग्य और पुरुषार्थ, सबसे बड़ा दुःख, सन्मार्ग दर्शक गुरु, सपना या अपना, समर्पण, कारागृह नहीं सुधारगृह इत्यादि महत्वपूर्ण विषयों पर वृहद व्याख्या को परिलक्षित किया गया है। जनमानस भी इस पुस्तक का गुणग्राही दृष्टि से अध्ययन कर सन्मार्ग पर अग्रसर हो सकता है।
गुरुत्तं भाग-3
प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-3" में परम पूज्य आचार्य भगवन् श्री वसुनंदी जी मुनिराज के मुखारविंद से नि:सृत ज्ञानामृत की बूंदों का अनोखा संग्रह है जो कि जयपुर चातुर्मास-2015 में हुई मीठे प्रवचन श्रंखला के प्रवचनों का सुंदरतम उपहार है। इसमें "अब तो छोड़ो चमडे का व्यापार, बचपन की संजीवनी, जीवन की अंतरधारा, झूर्रियों की यथार्थता" इत्यादि जनहितकारी, मर्मभेदी उपदेशों का कोष है।
चूको मत
जय बजरंगबली
जीवन का सहारा
ठहरो! ऐसे चलो
प्रस्तुत कृति "ठहरो! ऐसे चलो" आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के उन प्रवचनों का संकलन है जिसके माध्यम से पूज्य गुरुदेव ने लोगों का सम्यक् मार्ग दर्शन किया। मंजिल की ओर बढ़ना भी एक कला है, इस कला को प्रस्तुत कृति के माध्यम से जानने और सीखने का प्रयास कर अपनी मंजिल को पाना कठिन नहीं होगा। पूज्य श्री के ये प्रवचन भटके हुए व्यक्ति को राह की भटकन से हटाकर अपनी मंजिल की ओर प्रेरित करने के लिए संजीवनी के समान हैं।
तैयारी जीत की
प्रस्तुत कृति "तैयारी जीत की" एक प्रवचन शैली के रूप में प्रस्तुत है, जिसके माध्यम से दुखों में, संकटों में, पाप के उदय में कैसे अपने आप को संभालें, कैसे उनसे जीते इसकी प्रेरणा, जीवन में ओज और हारे हुए में जोश भरने का दायित्व अच्छी तरह से निहित है। पॉजिटिव थिंकिंग व पुरुषार्थ पर जोर देते हुए छोटे-छोटे दृष्टांत, मुक्तक, दोहे व अंग्रेजी सूक्तियों के माध्यम से अनुत्साही, निष्फल, असफलता को प्राप्त बंधुओं को नई दिशा व मार्ग प्रकाशित किया है। आप भी तैयारी जीत की कर लीजिए।
दशामृत
प्रस्तुत ग्रंथ "दशामृत" आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा दस धर्म पर प्रदत्त कल्याणकारी प्रवचनों का संकलन है, जिसमें सरल और उचित उदाहरणों से दस लक्षण धर्म को गंभीरता से समझाया है। उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव आदि विषयों को न केवल विभिन्न उदाहरणों से समझाया है अपितु आचार्य प्रणीत शास्त्रों के प्रमाणिक श्लोक, गाथा आदि से अपनी बात पुष्ट भी की है। प्रवचनों को बहुत सरल, सारगर्भित, रोचक और स्पष्टीकरण के साथ प्रस्तुत किया है। नोट-ये ग्रंथ विद्वानों के साथ-साथ सामान्य श्रावकों के लिए भी उपयोगी है।
ना मिटना बुरा है न पिटना
प्रस्तुत कृति "न मिटना बुरा है न पिटना" परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के अजमेर में अयोजित दस दिवसीय मीठे प्रवचन श्रंखला के प्रवचनों का प्रकाशित अंक है। जिसमे "जीवंत कौन, सामाजिक एकता, साथी सगा न कोई, पाप बिना अपराधी कैसे" इत्यादि विषयों पर रोचक उदाहरणों सहित उपदेश हैं। नोट-प्रवचनकार के लिए ये एक उपयोगी कृति है।
नारी का धवल पक्ष
शायद यही सच है
श्रुत निर्झरी
प्रस्तुत कृति "श्रुत निर्झरी" परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के लोकोपचारी प्रवचनो का संकलन है। ये प्रवचन मानवता के प्रहरी एवं धर्म के प्रेरक निमित्त हैं। सदाचार, सुसंस्कार, शिष्टाचार व सभ्यता की मंगल प्रेरणा देने वाले हैं। प्रस्तुत कृति में "सदाचार की महिमा", "अमावस्या की रात्रि में प्रज्ज्वलित दीप", "कौन धनी त्रिशला के महल का", "घर को स्वर्ग कैसे बनाएं" इत्यादि विषयों पर रेवाड़ी में हुए मीठे प्रवचन श्रृंखला 2014 से संकलित प्रवचन आपके लिए प्रेषित किए गए हैं।
