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साहित्य

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48 ग्रंथ

Guruttam bhag-19 (गुरुत्तं भाग-19)

Guruttam bhag-19 (गुरुत्तं भाग-19)

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परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी, प्राकृत भाषा चक्रवर्ती आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के प्रवचनों की श्रंखला "गुरुत्तं" नाम से सर्व प्रसिद्ध है। जिसके 18 भाग प्रकाशित हो चुके हैं। प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-19" में "नियमों का महत्व", "जीवन: अवसर या प्रमाद" , "पंचम काल में सत्य का प्रभाव " , "किसका भाग्य सहायक" जैसे शीर्षकों पर आचार्य भगवन के प्रेरणादायक प्रवचन हैं। हमें आशा ही नहीं बल्कि विश्वास है कि इन प्रवचनों का समीचीन रूप से अध्ययन कर आप अपनी विशुद्धि वृद्धिंगत करते हुए जीवन में सम्यक परिवर्तन लाकर स्वात्मोन्नति के साथ परिवार, समाज व देश की उन्नति में भी निमित्त बनेंगे।

Guruttam part- 18

Guruttam part- 18

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प्रस्तुत पुस्तक गुरुत्तं भाग- 18 आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी मुनिराज के मीठे प्रवचनों का संकलन है। इसमें मंद व तीव्र कषायी जीव के चिन्ह, संगति ,वृद्धि ही समृद्ध, अहिंसा, जिन सूत्रों का महत्व इत्यादि विषयों पर आचार्य श्री के प्रवचनों का संकलन है ।

Guruttam part- 20 (गुरुत्तं भाग-20)

Guruttam part- 20 (गुरुत्तं भाग-20)

Hindi

परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी, प्राकृत भाषा चक्रवर्ती आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज के प्रवचनों की श्रंखला "गुरुत्तं" नाम से सर्व प्रसिद्ध है।जिसके 18 भाग प्रकाशित हो चुके हैं। प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग- 20" में संकलित प्रवचन जीवन में विविध आयामों का स्पर्श करते हैं। "जीवन प्रबंधन के सूत्र", "गुरु का महत्त्व" , "खर्च कहा और कैसे", "दृढ़ संकल्प की शक्ति", जैन धर्म का प्राण- भावना एवं सहनशक्ति जैसे शीर्षक इस कृति में समाहित हैं, जो व्यक्ति को केवल पढने के लिए ही नहीं बल्कि बार- बार चिंतन मनन के लिए भी बाध्य करते हैं।

आईना मेरे देश का

आईना मेरे देश का

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उत्तम आकिंचन धर्म (परिग्रह चिंता दुःख ही मानो)

उत्तम आकिंचन धर्म (परिग्रह चिंता दुःख ही मानो)

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उत्तम आर्जव धर्म (रंचक दगा बहुत दुःखदानी)

उत्तम आर्जव धर्म (रंचक दगा बहुत दुःखदानी)

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उत्तम क्षमा धर्म (आत्मा का ए.सी. रूम)

उत्तम क्षमा धर्म (आत्मा का ए.सी. रूम)

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उत्तम तप धर्म (तप चाहे सुरराय)

उत्तम तप धर्म (तप चाहे सुरराय)

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उत्तम त्याग धर्म (निज हाथ दीजे साथ लीजे)

उत्तम त्याग धर्म (निज हाथ दीजे साथ लीजे)

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उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म (चेतना का भोग)

उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म (चेतना का भोग)

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उत्तम मार्दव धर्म (मान महाविष रूप)

उत्तम मार्दव धर्म (मान महाविष रूप)

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उत्तम शौच धर्म (लोभ पाप का बाप बखाना)

उत्तम शौच धर्म (लोभ पाप का बाप बखाना)

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उत्तम संयम धर्म (जिस बिना नहिं जिनराज सीझे)

उत्तम संयम धर्म (जिस बिना नहिं जिनराज सीझे)

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उत्तम सत्य धर्म (सतवादी जग में सुखी)

उत्तम सत्य धर्म (सतवादी जग में सुखी)

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खुशी के आँसू

खुशी के आँसू

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खोज क्यों रोज-रोज

खोज क्यों रोज-रोज

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गुरुतं भाग 1-24

गुरुतं भाग 1-24

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गुरुत्तं भाग -4

गुरुत्तं भाग -4

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प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-4" में परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज का अद्भुत चिंतन जो भव्यों के कर्णगोचर हुआ उसको यहां कल्याणार्थ लिपिबद्ध किया गया है।इसके अंतर्गत "योग्यता की परख, सहनशीलता, चिंता, धैर्य, समताभाव, मानव, संकल्प, मर्यादा" इत्यादि सार्वजनिक, सार्वभौमिक विषयों का विवेचन किया गया है जो आबालवृद्ध और सामान्यजन से विद्वत् वर्ग तक अवग्राह्य है।

गुरुत्तं भाग- 10

गुरुत्तं भाग- 10

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ये "गुरुत्तं भाग-10" पुस्तक आचार्य गुरुवर श्री वसुनन्दी जी मुनिराज के उन मीठे प्रवचनों का संकलन है जो मीठी औषधि के समान ग्रहण करने में सुखद और स्वास्थय भी अनुकूल करती है। इस भाग में "नरक के 3 द्वार, समय का सदुपयोग, निंदा का फल" आदि जीवनोपयोगी विषयों पर 21 प्रवचन हैं।

गुरुत्तं भाग- 11

गुरुत्तं भाग- 11

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प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-11" में आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा दिए गए आत्म हित के लिए प्रेरित करने वाले "आद हिदं कादव्वं, आत्म हित" जैसे आध्यात्मिक और जिन भक्ति को बढ़ाने वाले 10 प्रवचनों का संकलन है।

गुरुत्तं भाग- 12

गुरुत्तं भाग- 12

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प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-12" में संकलित आचार्य गुरुवर श्री वसुनंदी जी मुनिराज के प्रवचन व्यक्तित्व को विराटता, हृदय को उदारता और विचारों को समीचीनता प्रदान करने वाले हैं। इस भाग में "जुबान की मिठास, टकराव नहीं समझौता, कर्तव्यनिष्ठ बनो" आदि 20 विषयों पर प्रवचन हैं, जो जीवन को सम्यक् दिशा और दशा देने वाले हैं।

गुरुत्तं भाग- 13

गुरुत्तं भाग- 13

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प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-13" परम पूज्य अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी आचार्य गुरुवर श्री वसुनंदी जी महाराज के मीठे प्रवचनों का संकलन है। इसमें "उन्नति के चार सूत्र, चिन्ता के कारण, पहचानें समय की कीमत, कैसे वचन बोलें" इत्यादि समसामायिक शीर्षकों पर उपदेश देकर सभी के साथ युवा पीढ़ी पर विशेष उपकार किया है। तथा "सम्यक् ज्ञान, आत्महित के सूत्र, धन्य कौन" आदि शीर्षकों पर उपदेश देकर आत्म कल्याण हेतु प्रेरित कर मोक्षमार्ग पर भी अग्रसर किया है।

गुरुत्तं भाग- 14

गुरुत्तं भाग- 14

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"गुरुत्तं भाग-14" ये कृति आचार्य गुरुवर श्री वसुनंदी जी मुनिराज के 2019 नोएडा चातुर्मास में रविवार में हुए प्रवचनों का संकलन है। इसमें "समय का लुटेरा, गुरुत्वाकर्षण, नारी निर्मल बने निर्बल नहीं" आदि 9 आकर्षक विषयों पर प्रवचन हैं।

गुरुत्तं भाग- 15

गुरुत्तं भाग- 15

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प्रस्तुत कृति "गुरुत्तं भाग-15" में "पुण्य के 13 फल, महापुरुष, पंडित कौन, बंधन" आदि 21 विषयों पर आचार्य श्री वसुनन्दी जी मुनिराज के प्रवचन हैं। जो समीचीनता को समझने में आसान है।