णमो अरिहंताणं · णमो सिद्धाणं · णमो आइरियाणं · णमो उवज्झायाणं · णमो लोए सव्वसाहूणं
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णमो जिणाणं

अखिल भारतवर्षीय निर्ग्रन्थ ग्रंथमाला समिति (पंजी.)

श्रुत-सेवा : जिनशासन की अविनश्वर परंपरा का दिव्य अभियान

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परिचय

परम पूज्य आचार्य श्री 108 वसुनंदी जी मुनिराज

इस पावन संस्था की स्थापना परम पूज्य प्राकृत भाषा चक्रवर्ती, अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी, आचार्य भगवन् गुरुवर श्री वसुनंदी जी मुनिराज के करकमलों से हुई। सौ से अधिक प्राकृत ग्रंथों के रचयिता, उनका व्यक्तित्व श्रुतभक्ति और ज्ञानसाधना का अद्वितीय संगम है।

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