55 ग्रंथ
सुकुमाल चरित्र (आ. श्री सकलकीर्ति जी)
आचार्य श्री सकलकीर्ति जी द्वारा रचित "सुकुमाल चरित्र" नामक प्रशस्त ग्रंथ का संपादन आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा किया गया है। जो उपसर्ग विजेता मुनि सुकुमाल के चरित्र पर आधारित है। उनके गृहस्थ जीवन में पालन पोषण, राज्य और वैराग्योपरांत तपस्या एवं उपसर्ग का बड़े सुंदर और रोचक रूप से दर्शन है। प्रस्तुत कृति अज्ञान से तमोवृत भवारण्य में पथ भ्रष्ट हो, संसार में भटकते हुए भव्य प्राणियों के लिए सद्ज्ञान रश्मि के समान है। यह मुनि निंदा जैसे जघन्यतम अपराधों से मुक्ति दिलाने वाला और धर्म का अचिन्त्य महात्म्य प्रकाश करने वाला शास्त्र है।
सुदर्शन चरित्र (आ. विद्यानंदि मुनि)
प्रस्तुत ग्रंथ "सुदर्शन चरित्र" सेठ सुदर्शन को आधार बनाकर लिखा गया है। जिसमें उनकी णमोकार मंत्र पर दृढ़ श्रद्धा, मुनिराज की एक रात्रि में की गई वैय्यावृत्ति का फल व उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं को लिपिबद्ध किया है। इस ग्रंथ की रचना भट्टारक श्री विद्यानंदी जी के द्वारा लगभग सन् 1593 में गंधारपुरी (सूरत) में स्थित जैन मंदिर में की गई थी। ग्रंथ का संपादन आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा किया गया है। नोट-इस ग्रंथ की सरल भाषा अल्पज्ञ व्यक्तियों के लिए भी रोचक शैली है जिससे स्वाध्यायार्थी आद्योपांत पढें बिना इस ग्रंथ को नहीं छोड़ता।
सुभौम चक्रवर्ती चरित्र
आचार्य श्री वसुनंदी जी मुनिराज द्वारा संपादित प्रस्तुत ग्रंथ 9वें चक्रवर्ती सुभौम के जीवन चरित्र पर आधारित है। महामंत्र णमोकार के अनादर के फल, विषयों में आसक्त होने का परिणाम, पुण्य-पाप का प्रत्यक्ष फल बताने वाला सरल और पापों से भयभीत कर धर्म की प्रेरणा देने का प्रबल निमित्त है। भट्टारक रत्नचंद जी द्वारा रचित इस ग्रंथ में सुभौम चक्रवर्ती के भवों का वर्णन 7 सर्गों और 822 आर्या छंदों के निमित्त से बड़े ही मनोहर वचनों में किया गया है।
सुरसुंदरी चरित्र
सुलोचना चरित्र
सुशीला उपन्यास (पं. गोपालदास वरैया)
गोपाल दास बरैया द्वारा रचित प्रस्तुत "सुशीला उपन्यास" समाज में विद्यमान बुराईयों का विध्वंसक, धार्मिक भावनाओं का संप्रेरक, नीति-रीति का पक्षधर, पाप भीरुता और वैराग्य का संपोषक है। यह विश्व का एक ऐसा उपन्यास है जिसमें जैन दर्शन में निहित कर्म सिद्धांत चर्चा, गुणस्थान कथन और क्षपक एवम् उपशम श्रेणी के आरोहक योगियों के परिणामों के बारे में अपूर्वकरण, अनिवृत्तिकरण का दृष्टांतों के द्वारा अत्यंत सरल शब्दों में विवेचन किया है। भाषा सरल और बोधगम्य है।
हनुमान चरित्र
प्रस्तुत ग्रंथ "हनुमान चरित्र" मोक्षगामी कामदेव श्री हनुमान जी पर आधारित है। उनके जीवन काल पर चित्रित समस्त उतार-चढ़ाव को दर्शाता है, जिसके पठन- पाठन से जीवन में वैराग्य, समता और सेवा भाव जागृत होता है। कविवर ब्रह्यराय जी द्वारा रचित ये ग्रंथ आबाल वृद्ध सभी आत्म-कल्याणेच्छुओं के लिए स्वाध्याय करने योग्य, सरल और सुगम भाषा में लिपिबद्ध है। मोक्षगामी महापुरुष श्री हनुमान जी के संबंध में लोगों में फैली हुई कपोल कल्पनाओं को दूर करने के लिए उनका यथार्थ एवम् सत्य रूप जीवन चरित्र वर्णित है।
