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45 ग्रंथ
अदालत में धर्म
आराधना से आराध्य
इन्द्रध्वज विधान
कर्म विजेता (जिनसहस्रनाम विधान)
कर्मक्षय विधान
कल्पद्रुम विधान
कल्याण मन्दिर विधान
चारित्र शुद्धि विधान
चौंसठ ऋद्धि विधान
चौबीसी विधान
ज्ञानवर्धक अर्चना (श्रुत स्कंध विधान)
णमोकार का महत्त्व
तत्वार्थ सूत्र विधान
आचार्य भगवन् श्री उमास्वामी द्वारा रचित प्रस्तुत ग्रंथ 357 सूत्रों से युक्त है, जिसके माध्यम से रचनाकार ने चारों अनुयोगों का समावेश कुल 10 अध्यायों में किया। सूत्रों का हिंदी अर्थ परम पूज्य भारत गौरव आचार्य श्री देशभूषण जी मुनिराज द्वारा सरल व ज्ञानवर्द्धक रूप से है। तत्त्वार्थ सूत्र जैन दर्शन का एक ऐसा प्रतिनिधि स्वरूप मूल ग्रंथ है जिसका गुरुमुख से अध्ययन करने पर जैन धर्म की आत्मा से साक्षात्कार हो जाता है।
